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सूत्रों के अनुसार, 2020 में भारत में 3,66,138 सड़क हादसों की रिपोर्ट आई जिसमें 1,31,714 से अधिक लोगों की मौत हुई है। इस तरह की घटनाओं की संख्या कम करने के लिए सरकार सेफ ड्राइविंग और सड़क सुरक्षा के लिए शिक्षा, परिवर्तन और आपातकालीन देखभाल से सशक्त रणनीतियों का निर्माण कर रही है।
नागरिकों को कार मालिक और पैदल यात्रियों दोनों के लिए डिजाइन किए गए सड़क सुरक्षा नियमों का पालन करना चाहिए ताकि उनकी सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
सेफ ड्राइविंग के लिए मूल मंत्र यह है कि जितना हो सके धीमी गति से और जितनी गति आवश्यक हो उतने गति पर ही ड्राइव करें।
आपके संदर्भ के लिए यहां सेफ ड्राइविंग के कुछ टिप्स दिए गए हैं -
आजकल, सड़क पर कई घातक दुर्घटनाएँ इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स जैसे मोबाइल फ़ोन लाउड म्यूजिक और इसी तरह के अन्य उपकरणों से डिस्ट्रैक्ट होने के कारण होती हैं। नेशनल हाईवे ट्रैफिक सेफ्टी एडमिनिस्ट्रेशन की रिपोर्ट है कि ड्राइवर की प्रतिक्रिया में देरी के कारण अधिकतम रियर-एंड टक्कर होती है। इसलिए कार चलाते समय इस तरह के डिस्ट्रैक्शन से आपको बचना चाहिए।
गति सीमा बनाए रखना आवश्यक सड़क सुरक्षा सावधानियों में से एक है। गति सीमा निर्धारित करने के पीछे का उद्देश्य चालकों, यात्रियों और पैदल चलने वालों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
कार चलाते समय सीट बेल्ट नहीं लगाना धारा 138 (3) CMVR 177 MVA के तहत एक क़ानूनी अपराध है। एक सीट बेल्ट दुर्घटना के दौरान चोट लगने या आकस्मिक मृत्यु के जोखिम को कम कर सकता है। सेफ ड्राइविंग को बनाये रखने के लिए सीट बेल्ट पहनना ड्राइवर और पैसेंजर दोनों के लिए बेहद जरूरी है।
वित्तीय शुल्क, शारीरिक चोट, या घातक दुर्घटनाओं से खुद को बचाने के लिए यातायात नियमों का पालन करना अनिवार्य है। यह ड्राइविंग के लिए सेफ्टी टिप्स के तहत सबसे महत्वपूर्ण टिप्स में से एक है।
सड़क पर ट्रैफिक अनुशासन को बढ़ाने के लिए व्यस्त सड़क पर लेन बदलते समय आपको किसी भी गाड़ी को ओवरटेक करने से बचना चाहिए। अगर लेन बदलना जरूरी हो तो आप अपनी राइट और से ओवरटेक करें क्योंकि इंडियन ट्रैफिक रूल के अनुसार लेफ्ट साइड से ओवरटेक करना एक क़ानूनी जुर्म हैं।
आपकी कार के वॉर्न-आउट पार्ट्स की रिपेयरिंग करने से आप ड्राइविंग का स्मूथ एक्सपीरियंस ले सकेंगे। ब्रेक, हेडलाइट, टायर और साइड मिरर के खराब होने से दुर्घटना हो सकती है, इसलिए आपको इनके मेंटेनन्स पर नियमित रूप से ध्यान देना चाहिए।
यदि कार अचानक से बीच सड़क पर रुक जाए तो अपने आगे वाली कार से एक ऑप्टिमम डिस्टेंस बनाए, ताकि आपको किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने के लिए पर्याप्त समय और स्थान मिल सके। प्रैक्टिकल गाइडलाइन और स्ट्रेटेजी के साथ कार चलाते समय ये सभी चीज़ें सुरक्षा नियमों के अंतर्गत आती हैं।
कार चलाते समय आपकी दृष्टि बिल्कुल स्पष्ट होनी चाहिए, और यदि खासकर आप किसी कमर्शियल व्हीकल को चला रहे हैं, तो आपको आपकी व्हीकल के ब्लाइंड स्पॉट की जानकारी होनी चाहिए।
कार की प्रकार के आधार पर, ब्रेक का आकार भी अलग-अलग होता है। आपकी कार की रिग जितनी बड़ी होगी, उसे रुकने में भी उतना ही अधिक समय लगेगा। कमर्शियल कार के ड्राइवर के लिए, यह सेफ्टी ड्राइविंग टिप्स के तहत एक एसेंशियल पॉइंट है।
इमरजेंसी व्हीकल जैसे एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड आदि को पार होने के लिए जगह दें। उन्हें ओवरटेक करने की कोशिश न करें; बल्कि इसके बजाय, अपनी कार को को साइड में लेकर चले जाएं, और उस व्हीकल के लिए रास्ता बनायें।
सावधानी इलाज से बेहतर है! आप ऑन रोड या ऑफ रोड ड्राइव कर सकते हैं; हालाँकि, आपको दोनों ही मामलों में सेफ्टी मैसर्स का पालन करने की ज़रूरत पड़ेगी। आपको अपने और दूसरों के जीवन को रिस्क में डाले बिना सेफ तरीके से कार चलाने के मैसर्स के बारे में पता होना चाहिए।
ऑन-रोड ड्राइविंग की तुलना में ऑफ-रोड सेफ ड्राइविंग टिप्स का पालन करना कंपेरटिवली ज्यादा सरल है-
आपको इन बातों को फॉलो करने की ज़रूरत पड़ेगी -
रोलओवर, क्रैश या आग से बचने के लिए उबड़-खाबड़ या असंरचित सड़कों पर ड्राइविंग की उचित तकनीकों को जानें।
कार के ब्रेकडाउन की स्थिति से बहार निकलने के लिए कार के पार्ट्स और रिपेयर किट का स्टॉक अपने पास रखें।
ऑप्टिमम स्पीड लिमिट बनाए रखें - दुर्घटना के रिस्क को कम करने के लिए ड्राइविंग में यह एक जरुरी पॉइंट है।
किसी भी दुर्घटना और चोट से बचने के लिए कार चलाते समय ट्रैफिक रूल का पालन करना सबसे महत्वपूर्ण है।
इसके अलावा -
नशे की हालत में कार न चलाएं।
यदि आप सुस्त महसूस कर रहे हैं या आपको कोई शारीरिक, मानसिक या दृष्टि संबंधी समस्या है तो गाड़ी न चलाएं।
जब भी आप गाड़ी चला रहे हों तो सतर्क रहें। सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सड़क, फुटपाथ और साइड-व्यू मिरर पर नजर बनाए रखें।
प्रतिकूल परिस्थितियों, जैसे बारिश, तूफान, या अन्य मौसम की बदलाव के स्थिति में सावधान रहें, और ड्राइव करने से बचें।
इमरजेंसी स्थिति के दौरान स्वयं को सेफ रखने की कोशिश करें और फिर दूसरों की सहायता करें। अपनी इमरजेंसी-किट को भी सेफ रखें ताकि इमरजेंसी स्थिति के दौरान आप इसे तुरंत एक्सेस कर सकें।
दुर्घटना के मामले में, अपनी चोट पर ध्यान दें, अगर आपके बस में हो तो आपको अन्य यात्रियों की भी मदद करने की कोशिश करनी चाहिए, सूचना का आदान-प्रदान करें और दुर्घटना का दस्तावेजीकरण करें। आपातकालीन हेल्पलाइन नंबरों को अपने पास रखें, ताकि आप ऐसी परिस्थितियों में उनसे मदद की मांग कर सकें।
कार चलाते समय आपको निम्नलिखित दस्तावेज़ों को अपने पास हमेशा तैयार रखना चाहिए, ताकि आप किसी मुसीबत की घड़ी में उनका इस्तेमाल कर सकें -
रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट इस बात का सुबूत है कि आपकी कार रीजनल ट्रांसपोर्ट ऑफिस में रजिस्टर्ड है। इसमें आपके पर्सनल डिटेल, कार डिटेल, और अगर आपकी कार सेकंड हैंड है तो आपको उसके पिछले ओनर के डिटेल्स भी अपने साथ में रखने की आवश्यकता की। अगर आप कभी किसी ट्रैफिक पुलिस द्वारा पूछताछ करने पर इसे पेश करने में विफल रहें तो आपसे 5000 रुपये जुर्माने के तौर पर लिए जा सकते हैं।
ड्राइविंग लाइसेंस यह इस बात का प्रमाण है कि आपकी उम्र 18 वर्ष से अधिक हैं और आपने ड्राइविंग के लिए आवश्यक टेस्ट को पास कर लिया है। मोटर व्हीकल एक्ट 1988 के अनुसार, अगर आप इसे प्रदान करने में विफल हो जाते हैं तो आपसे 5000 रुपये का शुल्क जुर्माने के तौर पर लिया जा सकता है।
पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल सर्टिफिकेट द्वारा इस बात की जानकारी मिलती है कि आपकी कर द्वारा कितनी मात्रा में कार्बन मोनोऑक्साइड या पॉल्यूशन को बहार निकाला जा रहा है। यह सर्टिफिकेट आपको केवल तभी प्राप्त हो सकता है, जब आपकी कार एक दी गयी सीमा के अंदर पॉल्यूशन को निकाल रही हो। अगर आप पूछताछ के दौरान इस सर्टिफिकेट को पेश करने में विफल होते हैं तो आपको आपसे 1000 रूपए का शुल्क जुर्माने के तौर पर आपसे लिया जायेगा।
किसी भी दुर्घटना के मामले में स्वयं को, अपनी कार को और पैदल चलने वालों लोगों को सेफ रखने के लिए आपके पास एक इंश्योरेंस पॉलिसी का होना बहुत महत्वपूर्ण है। जब आप कभी सड़क पर अपनी कार ड्राइव कर रहे हों और अगर किसी पूछताछ के दौरान आप इसे पेश करने में जाते हैं तो आपसे 2000 रुपये का शुल्क जुर्माने के तौर पर लिया जा सकता है।
अगर आपकी कार पंद्रह वर्ष से अधिक पुरानी है, तो आपको संबंधित अथॉरिटी से उसका फिटनेस सर्टिफिकेट प्राप्त करना चाहिए, और आपको हर दो साल के बाद इसे रिन्यू कराना चाहिए।
सेफ ड्राइविंग के लिए इन टिप्स और सावधानियों को बरतना किसी भी व्यक्ति के लिए बेहद ज़रूरी है। सतर्कता, सुरक्षा रणनीति और आवश्यक उपाय अपनाने से आप कुछ को तथा अन्य लोगों को भी सेफ रख पाएंगे।