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भारतीय मोटर व्हीकल इंडस्ट्री काफी तेजी से आगे बढ़ रही है, इसके साथ ही विदेशी मोटर व्हीकल कंपनियों के देश में आने की वजह से इस इंडस्ट्री में काफी बढ़ोतरी देखने को मिली है। फाइनेंशियल ईयर 2020 में करीब 2.7 मिलियन पैसेंजर कार की सेल्स हुई थी। हमारे देश की हर एक व्हीकल के पास मोटर इंश्योरेंस पॉलिसी का होना अनिवार्य है।
क्या एक बेसिक कार इंश्योरेंस आपकी इन्वेस्टमेंट को सेफ रखने के लिए काफी है?
हमारे इस लेख में आपको ये पता चलेगा, की मोटर इंश्योरेंस प्लान को लेने से पहले आपको इंश्योर्ड डिक्लेयर्ड वैल्यू (IDV) पर क्यों ध्यान देना चाहिए?
IDV वह राशि होती है जो निर्माता के लिस्ट प्राइस में से डिप्रीशीएशन को घटाने के बाद आपको कंपनी द्वारा प्राप्त होता है। अगर इसे सरल शब्दों में समझें तो जो राशि इंश्योरेंस कंपनी द्वारा इंश्योर्ड होती है उसे इंश्योर्ड डिक्लेयर्ड वैल्यू के नाम से जाना जाता है।
अब अगर IDV को इंश्योरेंस की भाषा में समझा जाए तो, अगर आपकी कार को किसी प्रकार का भारी नुकसान होता है, या अगर आपकी कार वह चोरी हों जाती हैं, तो ऐसे में कंपनी जिस राशि का भुगतान करती है उसे हम IDV बुलाते हैं।
व्यावहारिक रूप से, IDV को उस अधिकतम कंपनसेशन के रूप में परिभाषित किया जा सकता है, जिसे आप अपनी मोटर इंश्योरेंस पालिसी से प्राप्त करने के लिए उत्तरदायी हैं, यदि इंश्योर कार के अपूरणीय नुकसान या चोरी से गुजरता है.
यहां याद रखने वाली एक महत्वपूर्ण बात यह है कि IDV आपकी पॉलिसी पर तभी लागू होता है, जब आपकी पॉलिसी में ओन डैमेज कवर भी शामिल हो। इस प्रकार, थर्ड-पार्टी लायबिलिटी इंश्योरेंस प्लान के पॉलिसी होल्डर किसी भी प्रकार से IDV से लाभान्वित नहीं सकते, क्योंकि उनके पास ओन डैमेज कवर नहीं है।
लेकिन, क्या आपके इंश्योरेंस में आपकी कार के लिए IDV पहले से निश्चित होती है?
भारत में कुछ इंश्योरर ग्राहकों को उनके कार की IDV को बढ़ाने या घटाने की अनुमति देते हैं। आप इस वैल्यू को नीचे दिए गए दो में से किसी भी एक तरीके का इस्तेमाल कर सकते हैं।
IDV की राशि को बढ़ाना - जब आपकी कार या बाइक को ऐसा नुकसान पहुँचता है जिसमे उसे रिपेयर करना संभव नहीं होता तो आप इस नुकसान के लिए अपनी इंश्योरेंस कंपनी से पर्याप्त कंपनसेशन प्राप्त कर सकते हैं। ऐसा करने के लिए, आप अपने इंश्योरर से बात कर सकते हैं, और उन्हें IDV को बढ़ाने के लये कह सकते हैं। ऐसा करने से आपके इंश्योरेंस से जुड़े ओन डैमेज कवर के प्रीमियम में थोड़ी सी ही बढ़ोतरी होगी।
IDV की राशि को घटाना - अगर आपके कार की बेस वैल्यू काफी अधिक और अगर आप उसे कम करना चाहते है, तो आप ये भी कर सकते हैं। इस तरह के बदलाव करने के लिए आपको अपने मोटर इंश्योरर से बात करनी चाहिए। हालांकि, ऐसा करने से अगर आपकी कार को कभी किसी भी प्रकार का नुकसान पहुँचता है तो आपके प्राप्त होने वाले क्लेम की राशि बंध जाएगी। आपके बेस IDV को कम करने का एकमात्र तरीका है की आप अपने इंश्योरेंस की प्रीमियम को कम कर दें
किसी न किसी तरह से निर्णय लेते समय, आपको यह समझना चाहिए कि ओन डैमेज प्रीमियम IDV का सिर्फ 2-3% हिस्सा होता है। इस प्रकार, IDV को बढ़ाने या घटाने से आपके प्रीमियम में अत्यधिक परिवर्तन नहीं होता। मैक्सिमम फाइनेंसियल सिक्योरिटी को सुनिश्चित करने के लिए, अपनी पॉलिसी के IDV को यथासंभव ऊँचा रखने के लिए कोशिश करनी चाहिए।
इससे आपको क्या लाभ मिल सकता है?चलिए देखते हैं!
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यदि आप अपने वित्तीय निवेश की रक्षा करना चाहते हैं तो आपको अपनी प्रिय कार या बाइक के लिए IDV वैल्यू को बढ़ानी चाहिए। यदि आप अभी भी आश्वस्त नहीं हैं, तो यहां निचे तीन ऐसे मामले हैं जिनमें एक पर्याप्त इंश्योर्ड वैल्यू का होना आपके लिए लाभदायक सिद्ध हो सकता है:
देखा जाए तो छोटी -मोटी दुर्घटना से आपके वाहन को कोई गंभीर नुकसान नहीं पहुँचती, लेकिन एक भयंकर सड़क दुर्घटना आपके प्रिय वाहन को पूरी तरह से नष्ट कर सकती है फिर चाहे वो कार हो या बाइक।
इस भारी नुकसान को आप किसी मामूली से गैरेज में ठीक नही करवा सकते, क्यूंकि ऐसे मामलो में हुए नुकसान एक आम मैकेनिक द्वारा नहीं किये जा सकते हैं। अक्सर ऐसे नुकसान परमानेंट होते हैं और अधिकतर मामलों में आपको अपने वाहन से हाथ भी धोना पड़ सकता है।
यदि आपकी इंश्योरेन्स पॉलिसी में IDV वैल्यू ज्यादा हैं, तो जाहिर सी बात है ये आपके लिए ‘डूबते को तिनके का सहारा’ वाली बात हों जाएगी। सरल शब्दों में कहें अगर तो IDV द्वारा प्राप्त होने वाली राशि को आप अपने नुकसान की भरपाई में लगा सकते हैं।
कहने का तात्पर्य यह है की IDV वैल्यू का पर्याप्त कंपनसेशन आप अपनी इंश्योरेंस कंपनी से ले सकते हैं - फिर चाहे आप अपने पुराने वाहन की मरम्मत करवाए या फिर एक ब्रांड न्यू कार/बाइक खरीदे।
अब जिन ग्राहकों ने अपनी IDV वैल्यू घाटा कर रखी थी, उनको कार ठीक करवाने के लिए वित्तीय जोखिम उठाना पड़ सकता है, या बैंक से नई गाड़ी के लिए ऑटो लोन भी लेना पड़ सकता है।
एक्सपर्ट ड्राइवर भी अक्सर अपनी पॉलिसी के IDV को कम करने की गलती करते हैं, क्योंकि उन्हें ऐसा लगता है की वो कभी किसी भयानक दुर्घटना में नहीं पड़ेंगे, जिनसे आपको किसी के भरी नुकसान का सामना नहीं करना पड़ेगा।
लेकिन, कई बार लोग भूल जाते हैं की उनकी कार किसी भयानक दुर्घटना में भी फस सकती है, और सबसे नुकसानदायक बात तो ये है की अगर आपकी कार एक हाई -एंड मॉडल वाली है, तो ऐसे में उसके चोरी होने की संभावना भी काफी बढ़ जाती है, और यदि आपके पास एक ओपन पार्किंग स्पेस है, तो ऐसे में चोरी की संभावना और अधिक बढ़ सकती है।
एक हाई IDV आपको आपकी कार या बाइक के चोरी हो जाने की स्थिति में भी आपकी सहायता करेगी। इंश्योरेंस कंपनी द्वारा प्राप्त हुए क्लेम की राशि को आप एक नयी कार या बाइक लेने के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं।
वित्तीय सहायता के साथ साथ बढ़ी हुई IDV आपको मानसिक तौर पर भी सभी चिंताओं से भी दूर रखेगी। कहने का मतलब है की चाहे आपकी कार/बाइक कितनी भी भयंकर एक्सीडेंट में पूरी तरह नष्ट ही क्यों न हो गई हो या फिर किसी ने चोरी ही कर ली हो, या जितना भी बड़ा नुकसान हुआ हो, एक्सटेंसिव क्लेम की राशि आपके हर वित्तीय नुकसान को कम करने का काम करती है।
इसलिए, ऐसे पॉलिसी होल्डर्स किसी भी नुकसान से हमेशा निश्चिंत रहते हैं, क्यूंकि उन्हें पता होता है की भले ही कितना ही नुकसान क्यों न हुआ हो इंश्योरेंस कंपनी द्वारा उनके नुकसान की पूरी भरपाई कर दी जाएगी।
यहां समझने वाली बात यह है अपने IDV के वैल्यू को मार्केट वैल्यू के आस पास या उससे ज्यादा रखना ही आपके लिए फायदे का सौदा हो सकता है। यदि आप इसे मार्केट वैल्यू नीचे रखते हैं तो ऐसा भी हो सकता है की कंपनी द्वारा जो राशि आपको कंपनसेशन के रूप में मिलेगी वो एक नयी कार या बाइक लेने के लिए पर्याप्त ना हो।
केवल पॉलिसी प्रीमियम के आधार पर IDV तय करने के बजाय व्यक्ति को अपनी वित्तीय सुरक्षा पर भी निश्चित रूप से ध्यान देना चाहिए, ताकि आगे चलकर उसे किसी प्रकार की हानि अथवा नुकसान का सामना न करना पड़े।
थोड़ा सा अधिक प्रीमियम आने वाले भविष्य में आपकी कार और आपके लिए काफी मददगार साबित हो सकता है, और आप अपनी मोटर इंश्योरेंस पॉलिसी का लंबे समय तक पूरा फायदा उठा सकते हैं।
IDV की कैलकुलेशन दो मुख्य कारकों के आधार पर की जाती है, जिसमें कार या बाइक के निर्माता की लिस्टेड कीमत पर आये डिप्रीशिएशन शामिल है।
डिप्रीशिएशन वाहन के पार्ट्स की प्राकृतिक कारकों के कारण वैल्यू में गिरावट को दर्शाता है। इस प्रकार, फोर व्हीलर या टू व्हीलर के लिए निर्माता की लिस्टेड कीमत में से डिप्रीशिएशन को घटाकर आने वाली राशि को IDV कहते है।
अधिकांश इंश्योरर OD कवर के लिए वार्षिक प्रीमियम के रूप में कार के IDV का एक निश्चित प्रतिशत चार्ज करते हैं। ज्यादातर मामलों में, यह पूरे IDV वैल्यू के 2 से 3% के बीच होता है।
इस प्रकार, यदि स्वयं की ओन डैमेज इंश्योरेंस पॉलिसी की IDV 5 लाख रुपये है, तो इसका प्रीमियम 10000 रुपये से 15000 रुपये के बीच होगा। ध्यान रखें कि यह सिर्फ OD प्रीमियम है। आपको इस राशि के साथ थर्ड पार्टी लायबिलिटी इंश्योरेंस के लिए प्रीमियम भी अलग से भरना पड़ेगा ।
इंश्योरेंस देने वाली कंपनी आपको किसी भी तरह से IDV का उपयोग करने के लिए बाध्य नहीं करते हैं। आप इस राशि का किसी भी तरह से उपयोग करने के लिए स्वतंत्र हैं। अधिकांश ग्राहक, जिनके वाहन को भारी नुकसान हुआ है, वे इस क्लेम राशि का उपयोग दूसरे व्हीकल को खरदने करने के लिए कर सकते हैं।
आप यह तय करने के लिए स्वतंत्र हैं कि आप अपनी पहले वाली कार या बाइक का ही मॉडल दोबारा से खरीदना चाहते है या फिर इस किसी नए ब्रांड या मॉडल के व्हीकल को खरीदना चाहते हैं को लेना चाहते हैं।