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वाहन का रजिस्ट्रेशन ट्रांसफ़र

जब आप अपने नाम पर रजिस्टर कार या कोई अन्य वाहन बेचते हैं तो कानून के मुताबिक आप वाहन का मालिकाना हक खरीदार को देने के लिए बाध्य होते हैं। आरसी ट्रांसफ़र की यह प्रकिया काफी जरूरी है, क्योंकि इससे सुनिश्चित होता है कि वाहन और इसकी कानूनी जिम्मेदारी नए मालिक को ट्रांसफर कर दी गई है ।

एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को वाहन का रजिस्ट्रेशन ट्रांसफर करने के लिए निश्चित प्रकिया अपनानी होती है। 

हालांकि, रुकिए!

ऐसे कई अलग-अलग मौके होते हैं जिनके तहत वाहन की आरसी ट्रांसफर की जा सकती है। इनको समझने के लिए नीचे की टेबल देखें:

परिस्थिति

विवरण

वाहन अगर किसी और ने ख़रीदा, है तो ट्रांसफ़र करें।

ऐसे हालात में वाहन के मालिक के तौर पर पुराने खरीदार की जगह नए खरीदार का नाम आरसी में जोड़ा जाता है।

रजिस्टर किए हुए मालिक की मृत्यु हो जाने पर ट्रांसफ़र करें।

● कानूनी उत्तराधिकारी को मालिक की मृत्यु के 30 दिनों के अंदर वाहन को लेकर अपनी योजना पंजीकरण प्राधिकरण को बताना होगा। ● कानूनी उत्तराधिकारी अपने नाम पर रजिस्टर कराए बिना वाहन का इस्तेमाल ज्यादा से ज्यादा 3 महीने तक कर सकता है।

नीलामी में वाहन का ट्रांसफ़र करें।

नीलामी के दौरान रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट पर पहले मालिक के नाम की जगह नए मालिक का नाम लिख दिया जाता है।

वाहन रजिस्ट्रेशन ट्रांसफ़र के प्रकार

राज्य के अंदर वाहन रजिस्ट्रेशन का ट्रांसफ़र- प्रक्रिया की पूरी जानकारी

एक राज्य से दूसरे राज्य में वाहन का रजिस्ट्रेशन ट्रांसफ़र- प्रक्रिया की पूरी जानकारी

वाहन के मालिकाना हक़ के ट्रांसफ़र की फीस क्या है?

रोड टैक्स कैसे रिफंड होगा?

वाहन आरसी ट्रांसफर से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले सवाल