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भारत में आने वाले भूकंप मुख्य रूप से हाई फ्रीक्वेंसी वाली श्रेणी के होते हैं जो कई बार 8.0 के मैगनीट्यूड से भी पार चला जाता है, इससे आप इस बात का अंदाजा तो लगा ही सकते हैं की भारत में आने वाले भूकंप कितने घातक होते हैं। नार्थ-ईस्टर्न जोन और हिमालयन रेंजेस भूकंप में सबसे अधिक प्रभावित होने वाले क्षेत्र हैं जो कई बार 8.0 के मैगनीट्यूड तक भी चला जाता है। हालाँकि, मॉडरेट भूकंप की संख्या इन विनाशकारी भुकपों की संख्या से कम होते हैं।
इस लेख में हम इस प्राकृतिक आपदा को अच्छे से समझने का प्रयत्न करेंगे और साथ ही भूकंप वाले क्षेत्रों पर भी प्रकाश डालेंगे।
भूकंप एक ऐसी विनाशकारी प्राकर्तिक आपदा है जिसमें पृथ्वी की ऊपरी सतह में कंपन होती है, जब लिथोस्फेरिक या क्रस्टल प्लेटों में मौजूद एनर्जी बहार की और निकलती है तो उसके परिणामस्वरूप उस क्षेत्र में रहने वाले लोगों को भूकंप के झटके महसूस होते हैं।
पृथ्वी की ऊपरी सतह या पपड़ी को सात प्रमुख प्लेटों में बाँटा जा सकता है। ये प्लेट 50 मील लगभग मोटे होते हैं, जो धीरे-धीरे लगातार अन्य छोटी-छोटी प्लेटों की ओर खिसकती रहती हैं। इन खिसकती हुई प्लेटों के बिच अचानक से होने वाले जोरदार झटकों के कारण, भूकंप पृथ्वी के निचली स्तर से हट कर ऊपरी स्तर की ओर बढ़ती है, जिस कारण से सिस्मिक वेव्स पैदा होते हैं।
भारत में कितने सिस्मिक जोन मौजूद हैं, इस सवाल को पूछने वाले या इसके बारे जानने की जिज्ञासा रखने वाले सभी लोग हमारे लेख के इस भाग को पढ़कर इस विषय से सम्बंधित पूरी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
हमें उम्मीद है की आप सभी हमारे देश भारत के नक्शे से बहुत अच्छे से वाकिफ होंगे, इस नक्शे के अनुसार भारत के सिस्मिक जोन को पुरे चार क्षेत्रों में बांटा गया है। इस सिस्मिक जोन को भूकंप जोन के नाम से भी जाना जाता है, इसके बनने के भी बहुत से कारण होते हैं, जिनमे से कुछ वैज्ञानिक इनपुट के आधार पर बनते हैं जो निचे दिए गए चीज़ों से संबंधित हैं:
जब किसी जोन में भूकंप की सिस्मीसिटी या आवृत्ति होती हैं तो उस क्षेत्र को सिस्मिक जोन बना दिया जाता हैं।
पिछले कई सालों में हुए भूकंप जिसकी वजह से हमारा देश प्रभावित हुआ है उन्हें भी सिस्मिक जोन के रूप में देखा जाता है।
भारत में होने वाले भूकंप को कुल चार जोन में बाटा गया हैं, जिसके विषय में हमने नीचे आपको काफी विस्तार से समझाने का प्रयत्न किया है:
सिस्मिक जोन II: जोन II को कम जोखिम वाले जोन के रूप में जाना जाता है जिसका मतलब यह है कि सिस्मिक जोन II सिस्मिकली सबसे कम सक्रिय क्षेत्र है, जिसका अर्थ यह है कि भारत के इन जोन के अंदर आने वाले क्षेत्रों में भूकंप आने की संभावना बेहद कम होती है। भारत के 41% भूकंप-प्रोन जोन को सिस्मिक जोन II कवर करता है। यहां, इंडियन स्टैण्डर्ड (IS) कोड 0.10 से एक जोन फैक्टर को बांटता है।
सिस्मिक जोन III: सिस्मिक जोन 3/III को मध्यम-क्षति जोखिम क्षेत्र के रूप में जाना जाता है, जिसका मतलब यह है कि इस जोन में भूकंप आने की संभावना न तो बहुत ज्यादा होती है, और न तो बहुत कम ही होती है। यहां, IS कोड इस क्षेत्र को 0.16 आवंटित करता है। जोन III, जिसे हम मध्यम भूकंप जोन के नाम से जानते हैं, यह भारत के 30% क्षेत्र को कवर करता है।
सिस्मिक जोन IV: जोन IV को अधिक क्षति पहुंचानेभारत में कितने सिस्मिक जोन मौजूद हैं, इस सवाल को पूछने वाले या इसके बारे जानने की जिज्ञासा रखने वाले सभी लोग हमारे लेख के इस भाग को पढ़कर इस विषय से सम्बंधित पूरी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
सिस्मिक जोन V: जोन V में भूकंपों से होने वाले नुकसान का सबसे अधिक खतरा बना रहता है क्योंकि यहाँ भूकंप आने की संभावना जोन II, जोन III और जोन IV, की तुलना में काफी अधिक होता है। IS कोड ने इस हाई-रिस्क डैमेज जोन करार किया है और इस क्षेत्र के लिए 0.36 का फैक्टर अलॉट किया है। पुरे देश का लगभग 11% हिस्सा सिस्मिक जोन V के अंतर्गत आता है।
नोट: पुरे भारत देश में ऐसा कोई भी शहर या क्षेत्र नहीं है जो कि सिस्मिक जोन I के अंतर्गत आता हो इसका अर्थ यह है की हमारे देश में ऐसा कोई शहर नहीं हैं जहाँ भूकंप का प्रभाव देखने को न मिलें।
ऊपर दी गयी सूचि भारत के विब्भिन क्षेत्रों के कुल भूकंप जोन तथा यह अलग अलग जोन पुरे देश के क्षेत्रफल का कितना हिस्सा कवर करते हैं इसकी जानकारी देता है। इसी के साथ चलिए अब हम ऐसे 10 शहरों पर अपनी नज़र डालते हैं जो अर्थक्वेक से सबसे ज्यादा प्रभावित रहते हैं।
भारत के ऐसे 10 शहरों की एक सूची नीचे दी गयी है जो भूकंप के खतरों से सभी अधिक प्रभावित रहते हैं। चलिए अब इन शहरों की सूची पर अपनी एक नज़र डालें।
तो अब जब कि आपने ये जान लिया हैं कि भूकंप से सबसे खतरा किन किन क्षेत्रों में हैं तो अब विभिन्न भारतीय शहरों और वे जिन भूकंप क्षेत्रों के अंतर्गत आते हैं उनके बारे में बात करते हैं।
इन भूकंप प्रोन क्षेत्रों के बारे में और अधिक जानने के लिए निचे दी गयी टेबल पर अपनी एक नज़र डालें जिससे आप भारत में भूकंप प्रोन क्षेत्रों को जानने में समर्थ हो सकेंगे।
भारत के भूकंप प्रोन जोन की सूची |
|
| जोन II | |
| शहर के नाम | राज्य के नाम |
| कुरनूल | आंध्र प्रदेश |
| नागार्जुनसागर | आंध्र प्रदेश |
| विशाखापत्तनम | आंध्र प्रदेश |
| भिलाई | छत्तीसगढ़ |
| रायपुर | छत्तीसगढ़ |
| रांची | छत्तीसगढ़ |
| जमशेदपुर | झारखंड |
| बैंगलोर | कर्नाटक |
| चित्रदुर्ग | कर्नाटक |
| गुलबर्गा | कर्नाटक |
| मैसूर | कर्नाटक |
| भोपाल | मध्य प्रदेश |
| सिरोंज | मध्य प्रदेश |
| औरंगाबाद | महाराष्ट्र |
| नागपुर | महाराष्ट्र |
| राउरकेला | उड़ीसा |
| पांडिचेरी | पांडिचेरी |
| अजमेर | राजस्थान |
| जयपुर | राजस्थान |
| जोधपुर | राजस्थान |
| कोटा | राजस्थान |
| उदयपुर | राजस्थान |
| मधुराय | तमिलनाडु |
| तंजावुर | तमिलनाडु |
| तिरुचिरापल्ली | तमिलनाडु |
| हैदराबाद | तेलंगाना |
| इलाहाबाद | उत्तर प्रदेश |
| झांसी | उत्तर प्रदेश |
| जोन III | |
| शहर के नाम | राज्य के नाम |
| नेल्लौर | आंध्र प्रदेश |
| वेल्लोर | आंध्र प्रदेश |
| विजयवाड़ा | आंध्र प्रदेश |
| गया | बिहार |
| गोवा | गोवा |
| पणजीम | गोवा |
| अहमदाबाद | गुजरात |
| काकरापार | गुजरात |
| राजकोट | गुजरात |
| सूरत | गुजरात |
| वडोदरा | गुजरात |
| बोकारो | झारखंड |
| बेलगाम | कर्नाटक |
| बीजापुर | कर्नाटक |
| धारवाड़ | कर्नाटक |
| करवार | कर्नाटक |
| मेंगलौर | कर्नाटक |
| कालीकट | केरल |
| तिरुवनन्थपुराण | केरल |
| जबलपुर | मध्य प्रदेश |
| मुंबई | महाराष्ट्र |
| नासिक | महाराष्ट्र |
| उस्मानाबाद | महाराष्ट्र |
| पुणे | महाराष्ट्र |
| सोलापुर | महाराष्ट्र |
| तारापुर | महाराष्ट्र |
| ठाणे | महाराष्ट्र |
| भुवनेश्वर | ओडिशा |
| कटक | ओडिशा |
| भटिंडा | पंजाब |
| पटियाला | पंजाब |
| बीकानेर | राजस्थान |
| चेन्नई | तमिलनाडु |
| कोयंबटूर | तमिलनाडु |
| कुड्डालोर | तमिलनाडु |
| धर्मपुरी | तमिलनाडु |
| कलपक्कम | तमिलनाडु |
| कांचीपुरम | तमिलनाडु |
| सलेम | तमिलनाडु |
| तिरुवन्नामलाई | तमिलनाडु |
| आगरा | उत्तर प्रदेश |
| बरेली | उत्तर प्रदेश |
| कानपुर | उत्तर प्रदेश |
| लखनऊ | उत्तर प्रदेश |
| वाराणसी | उत्तर प्रदेश |
| आसनसोल | पश्चिम बंगाल |
| बर्दवान | पश्चिम बंगाल |
| दुर्गापुर | पश्चिम बंगाल |
| कोलकाता | पश्चिम बंगाल |
| जोन IV | |
| शहर के नाम | राज्य के नाम |
| बरौनी | बिहार |
| मुंगेर | बिहार |
| पटना | बिहार |
| चंडीगढ़ | चंडीगढ़ |
| दिल्ली | दिल्ली |
| अंबाला | हरियाणा |
| शिमला | हिमाचल प्रदेश |
| अमृतसर | पंजाब |
| लुधियाना | पंजाब |
| गंगटोक | सिक्किम |
| बहराइच | उत्तर प्रदेश |
| बुलंदशहर | उत्तर प्रदेश |
| गोरखपुर | उत्तर प्रदेश |
| मुरादाबाद | उत्तर प्रदेश |
| अल्मोड़ा | उत्तराखंड |
| देहरादून | उत्तराखंड |
| नैनीताल | उत्तराखंड |
| पीलीभीत | उत्तराखंड |
| रुड़की | उत्तराखंड |
| दार्जिलिंग | वेस्ट बंगाल |
| जोन V | |
| शहर के नाम | राज्य के नाम |
| गुवाहाटी | असम |
| जोरहाट | असम |
| सादिया | असम |
| तेज़पुर | असम |
| दरभंगा | बिहार |
| भुज | गुजरात |
| मंडी | हिमाचल प्रदेश |
| श्रीनगर | जम्मू & कश्मीर |
| इंफाल | मनीपूर |
| कोहिमा | नागालैंड |
ऊपर दी गई सूची पर भारत में भूकंप के कारण प्रभावित होने वाले जितने भी क्षेत्र हैं उन्हें देखकर कोई भी स्पष्ट रूप से समझ सकता है कि जोन V के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों में भूकंप की संभावना सबसे अधिक होती है।
भारत में भूकंप की वजह से काफी नुकसान होता हैं यदि आप भूकंप-प्रोन क्षेत्र में रहते हैं तो आपकी अपने घर को भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदा से बचाने के लिए अर्थक्वेक इंश्योरेंस पॉलिसी लेने के विषय में विचार करना चाहिए, ताकि आप अपने होने वाले नुकसान को अधिक से अधिक कम कर सकें। इसके अलावा, आपको यह पता होना चाहिए कि अर्थक्वेक इंश्योरेंस पॉलिसी होम इंश्योरेंस पॉलिसी के अंतर्गत ही आती है।
होम इंश्योरेंस पॉलिसी भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान को पूरी तरह से कवर करती है। आप एक वर्ष या एक लंबे समय तक के लिए भी अपने घर के लिए होम इंश्योरेंस खरीद सकते हैं। अपने घर को इन आपदाओं से बचाने के लिए ऐसे प्लान को लेकर आपको इंश्योरेंस के साथ निम्नलिखित लाभ भी मिलते हैं:
आपकी इंश्योरेंस कंपनी आपके घर के मरम्मत या उसके पुनर्निर्माण के लिए होने वाले सभी खर्चों के लिए आपको एक कवर प्रदान करेगी।
ऐसे मामलों में घर के मालिक के साथ उसके पुरे परिवार के रहने के लिए एक जगह का बंदोबस्त किया जाता है जहाँ उन्हें तब तक रखा जाता है जब तक उनके घर के मरम्मत या पुननिर्माण का कार्य पूरी तरह से पूरा नहीं हो जाता।
यदि भूकंप के कारण आपके घर में रखी हुई किसी मूल्यवान वस्तु को नुकसान या क्षति पहुँचती है तो ऐसे में आपकी इंश्योरेंस कंपनी द्वारा इस नुकसान को भी कवर किया जायेगा।
भूकंप-इनडियुज्ड आग के कारण आपको होने वाले नुकसान का पूरा कवरेज आपकी इंश्योरेंस कंपनी द्वारा प्रदान किया जायेगा।
हमें आशा है की हमारे इस लेख को पढ़ कर आपको भारत में भूकंप क्षेत्रों की ठोस जानकारी प्राप्त हो गयी होगी। इसलिए, अगर आप भी किसी भूकंप क्षेत्र या शहर में रहते हैं, तो अब आपको बिना समय गवाए अपने घर के लिए उसके अनुसार एक अच्छा इंश्योरेंस प्लान ले लेना चाहिए |
अंबाला हरियाणा का एक शहर जो कि सिस्मिक जोन IV के अंतर्गत आता है।
जी नहीं, राजस्थान में लगातार भूकंप नहीं आते, क्योंकि यह क्षेत्र सिस्मिक जोन II के अंतर्गत आता हैं जो कि भूकंप के लिए कम खरते वाला क्षेत्र है।
हाँ, असम भारत में भूकंप-प्रोन राज्यों में से एक है, जहाँ भूकंप के झटकों को आये दिन महसूस किया जा सकता है।
वेस्टर्न और सेंट्रल हिमालयी क्षेत्र, भारत के उत्तर-पूर्वी भाग, कच्छ का रण, इंडो-गंगेटिक प्लेन, कश्मीर और राजस्थान भारत के कुछ ऐसे क्षेत्र हैं जिन्हें भूकंप के लिए वीक जोन के रूप में जाना जाता है।