महाराष्ट्र में पेट्रोल पर लगने वाले टैक्स में बारे में हर बात जानें
इस लेख में दी गई जानकारी, आखिरी बार 21 अक्टूबर 2022 को अपडेट की गई थी।
पिछले कुछ समय में देश की अर्थव्यव्यस्था में आई गिरावट की वजह से भारत सरकार के खजानें में नकदी पर असर पड़ा है। हालांकि, पेट्रोल-डीज़ल की कीमतों में बढ़ोतरी की वजह से सरकार को आर्थिक घाटा कम करने में मदद मिली है। फ़िलहाल, महाराष्ट्र में पेट्रोल की कीमतें 100 रुपये से ऊपर पहुंच गई हैं।
लेकिन आप इस बात से हैरान होंगे कि पेट्रोल इतना महंगा क्यों है और कौन सी ऐसी चीज़ें हैं जो इसकी कीमत बढ़ाने में शामिल हैं। महाराष्ट्र में लगने वाला पेट्रोल टैक्स इनमें से एक है।
यहां हम इस टैक्स के बारे में जानकारी साझा करेंगे जो महाराष्ट्र में पेट्रोल की कीमत पर लगता है।
महाराष्ट्र में पेट्रोल पर लगने वाला कुल टैक्स, वैट (वैल्यू एडेड टैक्स) और सेंट्रल एक्साइज़ ड्यूटी से मिलकर बना होता है। हालांकि, इसी साल अक्टूबर में एक्साइट ड्यूटी में कटौती की गई थी, लेकिन महाराष्ट्र सरकार ने वैट (VAT) को लेकर कोई फैसला नहीं किया। राज्य में फिलहाल 20.12 रुपये वैट के साथ 10.12 रुपये सेस वसूला जाता है।
यहां उन सभी कारणों और टैक्स पर नजर डालिये जो महाराष्ट्र में पेट्रोल की कीमत की गणना में शामिल होते हैं।
यहां हमने एक टेबल में महाराष्ट्र में पेट्रोल पर लगने वाले टैक्स के साथ उसकी मौजूदा कीमत की जानकारी दी है
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सेक्शन |
21 अक्टूबर से प्रभावी (रुपये प्रति लीटर में) |
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डीलर से लिया गया शुल्क |
57.35 रुपये प्रति लीटर |
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एक्साइज़ ड्यूटी (केंद्र सरकार द्वारा लागू) |
19.90 रुपये प्रति लीटर |
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डीलर का औसत कमीशन |
7.55 रुपये प्रति लीटर |
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वैट (राज्य सरकार द्वारा लागू) |
21.16 रुपये प्रति लीटर {(तेल की डीलर द्वारा ली जाने वाली कीमत+एक्साइज ड्यूटी+ डीलर का औसत कमीशन) का 25%} |
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महाराष्ट्र में तेल की खुदरा कीमत |
105.96 रुपये प्रति लीटर |
महाराष्ट्र में पेट्रोल पर टैक्स कौन लगाता है?
देश में पेट्रोल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है और इसका कोई अंत होता नहीं दिख रहा है इसलिए, इसका सीधा असर वाहन मालिकों और आम आदमी पर होने लगा है। राज्य में पेट्रोल की कीमत में दो तरह के टैक्स शामिल होते हैं और वो हैं एक्साइज ड्यूटी और वैट (VAT)। इनकी वजह से पेट्रोल महंगा हो जाता है। अब आप यह सोच रहे होंगे कि कौन सा टैक्स कौन वसूलता है?
सेंट्रल एक्साइज़ ड्यूटी केंद्र सरकार लागू करती है वहीं राज्य सरकार सेल्स टैक्स या वेल्यू एडेड टैक्स (लगभग 21.16 रुपये) लागू करती है। अब, एक्साइज़ ड्यूटी (19.90 रुपये) जो हर राज्य में एकसमान है, लेकिन वैट हर राज्य में अलग-अलग है।
महाराष्ट्र पर कोरोना महामारी का सबसे बुरा असर पड़ा है, राज्य का ग्रॉस स्टेट डोमेस्टिक प्रोडक्ट का राजकोषिय घाटा 3.3% था।
हाल ही में केंद्र ने पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी में 5 रुपये की कटौती की है। इसके बाद कई राज्यों ने भी पेट्रोल पर वैट में कटौती की है।
हालांकि, महाराष्ट्र में पेट्रोल पर टैक्स यानी वैट में अब तक कोई कटौती नहीं हुई है। साथ ही, महाराष्ट्र के रेवेन्यू मंत्री बालासाहेब थोराट ने दावा किया है कि केंद्र ने अब तक राज्य का बकाया 50,000 करोड़ का जीएसटी नहीं चुकाया है।
महाराष्ट्र में पेट्रोल टैक्स पर कौन सी चीज़ें असर डाल रही हैं?
आगे वो कारण बताए गए हैं जिनकी वजह से महाराष्ट्र में पेट्रोल की कीमत प्रभावित होती है।
1. क्रूड ऑयल की कीमत
दुनियाभर में क्रूड ऑयल की कीमत अलग-अलग हैं। जब भी इसकी कीमत में कोई बदलाव होता है, तो इसका असर भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमत पर भी होता है। यहां हमने उन चीज़ों के बारे में बताया है जिनकी वजह से क्रूड ऑयल की कीमत प्रभावित होती है-
- क्रूड ऑयल की मांग और आपूर्ति
- अंतरराष्ट्रीय राजनीति
- भविष्य के ऑयल रिज़र्व और सप्लाय
2. डीलर का दाम
अलग-अलग मार्केटिंग कंपनियां बाजार में क्रूड ऑयल वितरित करती हैं। यह संगठन, डीलर्स से इसकी एक तय कीमत वसूलते हैं। यह कीमतें, रिफायनिंग के खर्च, माल भाड़े जैसी चीज़ों पर निर्भर करती हैं। फिलहाल, हर बैरल के लिए रिफायनिंग पर कुल मार्जिन 2.5 डॉलर पर स्थिर है।
3. डीलर का कमीशन
ये ऑयल मार्केटिंग संगठन पेट्रोल पंप मालिकों को कुछ तय कमीशन देते हैं। इन कमीशन में उनकी कमाई, फायदा और दूसरे खर्च शामिल हैं। इसलिए, महाराष्ट्र में एक डीलर का कमीशन, पेट्रोल की कीमत पर असर डालता है।
4. सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी
केंद्र सरकार, पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी वसूल करती है। एक्साइज ड्यूटी पहले से तय होती है और वैट की तरह अलग-अलग नहीं होती। क्रूड ऑयल की कीमतों में बदलाव का इस पर कोई असर नहीं होता।
5. राज्य का सेल्स टैक्स
महाराष्ट्र सरकार, पेट्रोल पर वेल्यू एडेड टैक्स लगाती है जो पेट्रोल और डीजल दोनों पर लगता है। राज्य के इस सेल्स टैक्स की गणना तेल की मूल कीमत+एक्साइज ड्यूटी के आधार पर की जाती है। महाराष्ट्र सरकार, क्रूड ऑयल की कीमतों के अलावा डीलर के कमीशन और अन्य चीज़ों को ध्यान में रखकर पेट्रोल पर लगने वाले टैक्स को तय करती है।
6. ईंधन की मांग और आपूर्ति
वाहनों की मांग में तेज़ी के साथ-साथ पेट्रोल और डीजल की भी मांग बढ़ी है। तेल की बढ़ती हुई मांग के बीच, यह ज़रूरी नहीं की क्रूड ऑयल की आपूर्ति उस हिसाब से हो। इसका नतीजा यह है कि तेल की मांग और आपूर्ति में असंतुलन पैदा हो जाता है। इसलिए, तेल की कम आपूर्ति और बढ़ी हुई मांग की वजह से इसकी कीमतों में बढ़ोतरी हो जाती है।
इसके अलावा, क्रूड ऑयल को प्रोसेस करने की भी ज़रूरत होती है। इसलिए, इसे पहले रिफायनरी को भेजा जाता है। अगर रिफायनरी की संख्या कम है, तो तेल की आपूर्ति में कमी आएगी. नतीजतन, इससे तेल की कीमतों में और बढ़ोतरी होगी।
7. डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये का मूल्य
ज़्यादातर वैश्विक बिजनेस और आर्थिक लेन-देन अमेरिकी मुद्रा डॉलर (यूएसडी) में होते हैं। साथ ही, क्रूड ऑयल के लिए होने वाले कई तरह के लेन-देन भी यूएसडी में होते हैं। इसलिए, जब भी अमेरिकी डॉलर के मूल्य में कोई बदलाव होता है तो इसका असर भारतीय रुपये (आईएनआर) पर होता है। उदाहरण के लिए, अगर डॉलर का मूल्य बढ़ता है, तो क्रूड ऑयल खरीदने के लिए ज़्यादा दाम चुकाने होंगे।
क्या महाराष्ट्र के सभी शहरों में पेट्रोल टैक्स एक समान है?
जी हां, महाराष्ट्र के सभी शहरों में पेट्रोल पर लगने वाला वैट एक समान है। इसलिए, पूरे महाराष्ट्र में आपको पेट्रोल पर एक ही टैक्स चुकाना होगा। हालांकि, डीलर के कमीशन की वजह से, तेल की अंतिम कीमत जगह के हिसाब से अलग-अलग हो सकती है।
साथ ही, पेट्रोल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं और इस वजह से केंद्र और कई राज्यों की सरकारे एक्साइज ड्यूटी और वैट में कटौती कर सकती हैं। इसलिए, इसकी कीमतों पर लगातार नज़र बनाए रखें।