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भारत में अनिवार्य बाइक इंश्योरेंस

चाहे बात ग्रामीण इलाकों की हो या ट्रैफिक से भरे महानगरों की, भारत में टू-व्हीलर निस्संदेह सबसे उपयुक्त व्यक्तिगत परिवहन साधन हैं। इसका कारण यह है कि टू-व्हीलर आपको ग्रामीण क्षेत्रों की संकरी गलियों से लेकर मुंबई, बैंगलोर या दिल्ली जैसे व्यस्त महानगरों की भीड़भाड़ वाली सड़कों पर भी आसानी से चलने में मदद करते हैं। इसके अलावा, टू-व्हीलर अधिकांश लोगों के लिए आसानी से किफायती होते हैं। आजकल तो जो लोग टू‑व्हीलर खरीदने में सक्षम नहीं हैं, वे भी बैंकों से आसानी से लोन लेकर इन्हें खरीद सकते हैं।

इन सभी कारणों के साथ-साथ भारतीय मध्यम वर्ग की बढ़ती क्षमता और आकांक्षाओं ने भारत में टू‑व्हीलर की लोकप्रियता में तेज़ वृद्धि की है, जिसके चलते सड़कों पर पहले से कहीं अधिक टू-व्हीलर दिखाई देते हैं।

सड़कों पर टू‑व्हीलर की इस बढ़ती संख्या के साथ दुर्घटनाओं का जोखिम भी समान रूप से बढ़ गया है। इसी अनुपात में भारत में बाइक इंश्योरेंस की आवश्यकता भी बढ़ी है। क्यों और कैसे? आइए, इस लेख में विस्तार से जानें।

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भारत में बाइक इंश्योरेंस ज़रूरी क्यों है?

चाहे कोई ग्रामीण इलाका हो या महानगर, दोपहिया वाहन भारत में निजी परिवहन का सबसे बढ़िया साधन है। ऐसा इसलिए है क्योंकि दोपहिया वाहन आपको ग्रामीण क्षेत्रों की संकरी सड़कों कर साथ साथ मुंबई, बैंगलोर, दिल्ली जैसे व्यस्त महानगरों की भीड़भाड़ वाली सड़कों पर आसानी से आने जाने की सुविधा प्रदान करते हैं। इसके अलावा, ज़्यादातर लोगों के लिए दोपहिया वाहन आसानी से वहनीय होते हैं। जो लोग दोपहिया वाहन ख़रीदने का खर्चा नहीं उठा सकते हैं, उन्हें बैंकों से आसानी से लोन मिल सकता है।

ऊपर दिए गए कारकों ने भारतीय मध्यम वर्ग की बढ़ती क्षमता और आकांक्षाओं के साथ मिलकर भारत में दोपहिया वाहनों की लोकप्रियता में बढ़ोत्तरी की है, और इसलिए भारतीय सड़कों पर दोपहिया वाहनों की संख्या अब पहले से कहीं ज़्यादा है।

सड़क पर दोपहिया वाहनों की बढ़ती संख्या के साथ दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ गया है। और इसीलिए भारत में टू-व्हीलर इंश्योरेंस की ज़रूरत भी बढ़ गई है। क्यों और कैसे? आइए जानें।

आपको अपने दोपहिया वाहन का इंश्योरेंस क्यों लेना चाहिए?

नया दोपहिया वाहन बेचते समय लगभग सभी मोटर कंपनियां बाइक इंश्योरेंस ऑफ़र करती हैं। हालांकि, ज़्यादातर लोग थोड़े से डिस्काउंट के लिए इंश्योरेंस कैंसिल कर देते हैं या एक्सपायर होने के बाद इंश्योरेंस को रिन्यू नहीं करते हैं। ऐसा करके वे या तो इंश्योरेंस के खर्चे को बचाना चाहते हैं, या उनके पास अपना इंश्योरेंस रिन्यू करने का समय नहीं होता है! हालांकि, बाइक इंश्योरेंस के प्रति ऐसे रवैये का असली कारण यह है कि उन्हें इस सवाल का जवाब नहीं पता है कि उन्हें बाइक इंश्योरेंस क्यों लेना चाहिए?

अपने दोपहिया वाहन के लिए इंश्योरेंस लेने के पीछे दो मुख्य कारण हो सकते हैं: पहला, भारत में सभी दोपहिया वाहनों के लिए थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस लेना ज़रूरी है। दूसरा, इंश्योरेंस आपके वाहन और दुर्घटना में शामिल थर्ड-पार्टी की सुरक्षा करता है और साथ ही खर्चों से बचाता है।

हालांकि कम से कम थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस कानूनी तौर पर ज़रूरी है, परंतु ज़्यादातर कॉम्प्रिहेंसिव टू-व्हीलर इंश्योरेंस प्लान चुनने पर ज़ोर दिया जाता है। कॉम्प्रिहेंसिव पॉलिसी आपके वाहन की दुर्घटनाओं, चोरी, प्राकृतिक आपदाओं वगैरह से सुरक्षा करती है। इसके अलावा, कॉम्प्रिहेंसिव इंश्योरेंस पॉलिसी में थर्ड-पार्टी को हुए नुकसान को भी कवर किया जाता है। ताकि आप आसानी और समझदारी से इंश्योरेंस प्लान चुन सकें इसलिए नीचे थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस और कॉम्प्रिहेंसिव या स्टैंडर्ड इंश्योरेंस दोनों के बीच विस्तार से तुलना की गई है।

भारत में बाइक इंश्योरेंस प्लान

थर्ड पार्टी कॉम्प्रिहेंसिव

दुर्घटना के कारण दोपहिया वाहन को होने वाला नुकसान/क्षति

×

आग लगने के कारण आपके दोपहिया वाहन को हुआ नुकसान/क्षति

×

प्राकृतिक आपदा के मामले में आपके दोपहिया वाहन को हुआ नुकसान/क्षति

×

थर्ड-पार्टी वाहन को हुआ नुकसान

×

थर्ड-पार्टी की प्रॉपर्टी को हुआ नुकसान

×

व्यक्तिगत दुर्घटना कवर

×

थर्ड-पार्टी व्यक्ति को चोट/मृत्यु

×

आपके स्कूटर या बाइक की चोरी

×

अपना आईडीवी (IDV) कस्टमाइज़ करें

×

कस्टमाइज़ किए गए ऐड-ऑन के साथ अतिरिक्त सुरक्षा

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कॉम्प्रिहेंसिव और थर्ड-पार्टी टू-व्हीलर इंश्योरेंस के बीच अंतर के बारे में और ज़्यादा जानें

डिजिट, मार्केट में मौजूद सबसे स्पष्ट, संतुलित कॉम्प्रिहेंसिव टू-व्हीलर इंश्योरेंस पॉलिसी में से ऑफ़र करता है। डिजिट का कॉम्प्रिहेंसिव बाइक इंश्योरेंस सुपर-सिंपल क्लेम, बिना किसी हिडन कॉस्ट के स्पष्ट इंश्योरेंस प्रोसेसिंग मैकेनिज्म प्रदान करता है।

आप भले ही जिम्मेदार राइडर हो, लेकिन आप यह गारंटी कभी नहीं दे सकते कि आपकी बाइक के साथ कभी भी कोई सड़क दुर्घटना नहीं होगी। सावधानी से चलाने के बावजूद भी बिना किसी पूर्व चेतावनी के दुर्घटना हो सकती है। दुर्घटना के अलावा चोरी या प्राकृतिक आपदा जैसी घटनाएं भी हो सकती हैं। इस प्रकार की घटनाओं के लिए चाहे आप जिम्मेदार हों या नहीं, लेकिन यह निश्चित है कि इनसे आपको भारी आर्थिक नुकसान होगा। लेकिन अगर आपके पास कॉम्प्रिहेंसिव टू-व्हीलर इंश्योरेंस है, तो यह आपको आर्थिक नुकसान के साथ-साथ संभावित देनदारियों से भी बचाएगा।

इसके अलावा, मोटर व्हीकल एक्ट, 1998 के अनुसार भारत में बाइक इंश्योरेंस ज़रूरी है और दोपहिया वाहन ख़रीदने वाले को बाइक ख़रीदते समय बाइक इंश्योरेंस करवाना पड़ता है।

डिजिट के कॉम्प्रिहेंसिव टू-व्हीलर इंश्योरेंस में क्या शामिल है?

डिजिट की टू-व्हीलर इंश्योरेंस पॉलिसी नीचे दिए गए रिस्क को कवर करती है:

प्राकृतिक आपदाओं से होने वाला नुकसान या क्षति - प्राकृतिक आपदाएं जैसे भूकंप, तूफान, बाढ़ वगैरह हमारे जीवन में कभी भी आ सकते हैं और हमारे जीवन और संपत्ति को नुकसान पहुंचा सकते हैं। टू-व्हीलर इंश्योरेंस पॉलिसी आपको प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले सभी नुकसान के आर्थिक खर्चों से बचाती है।

मानव निर्मित आपदाओं के कारण होने वाला नुकसान - प्राकृतिक आपदाओं के अलावा आपकी बाइक को मानव निर्मित आपदाओं जैसे डकैती, चोरी, दंगे, या ऐसी किसी भी दुर्भाग्यपूर्ण घटना से नुकसान हो सकता है।

डिजिट की टू-व्हीलर इंश्योरेंस पॉलिसी भी आपको ऐसी मानव निर्मित आपदाओं से होने वाले सभी नुकसान के खिलाफ आर्थिक सुरक्षा प्रदान करेंगी।

दुर्घटना के कारण होने वाली पूर्ण या आंशिक विकलांगता - दुर्घटनाएं जीवन की सबसे बड़ी दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं में से होती हैं जो किसी भी समय बिना किसी संकेत के घटित हो सकती हैं। जब किसी राइडर के साथ कोई दुर्घटना होती है, तो वह आंशिक या पूर्ण विकलांगता का शिकार हो सकता है।

आंशिक विकलांगता के उदाहरणों में शरीर के किसी भाग का अक्षम होना, हिल न पाना वगैरह शामिल हैं, जबकि विजन का पूर्ण नुकसान, चलने में पूर्ण विफलता वगैरह पूर्ण अक्षमता के कुछ उदाहरण हैं। टू-व्हीलर इंश्योरेंस इन सभी को कवर करता है और आपको उपचार की कॉस्ट देता है।

पॉलिसीधारक की मृत्यु - किसी दुर्घटना से पॉलिसीधारक या दुर्घटना के समय बाइक पर सवार किसी तीसरे व्यक्ति की मृत्यु हो सकती है। ऐसे में, अगर पॉलिसीधारक ने पीए कवर का विकल्प चुना है तो बाइक इंश्योरेंस कंपनी पॉलिसीधारक के नॉमिनी को पर्याप्त मुआवजा देती है।

ये कुछ महत्वपूर्ण चीजें हैं जो डिजिट की टू-व्हीलर इंश्योरेंस पॉलिसी में शामिल हैं। भारतीय सड़कों पर यातायात नियमों का सख्ती से पालन नहीं किया जाता है, और इसलिए दोपहिया वाहन चलाते समय ज़्यादा जोखिम का सामना करना पड़ सकता है। दरअसल, सड़क पर कार चलाने की तुलना में दोपहिया वाहनों की सवारी करना जोखिम भरा माना जाता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि जब आप बाइक चलाते हैं, तो आप कार चलाने वाले व्यक्ति की तुलना में ज़्यादा खतरे के संपर्क में होते हैं क्योंकि वह कार के अंदर बैठा होता है। कॉम्प्रिहेंसिव टू-व्हीलर इंश्योरेंस जैसे कि डिजिट द्वारा दिया जाता है, आपको शारीरिक चोट, वाहन के पूर्ण या आंशिक नुकसान, राइडर की पूर्ण या आंशिक विकलांगता के साथ-साथ तीसरे पक्ष की देनदारी के लिए जोखिम कवरेज की बड़ी रेंज देता है।

भारत में बाइक इंश्योरेंस क्यों ज़रूरी है?- इस सवाल का सही उत्तर कानूनी अनुपालन, इसमें शामिल जोखिम कारक और कॉस्ट-सेविंग हैं। बाइक इंश्योरेंस के महत्व को समझने के बाद, अगर आपने अभी तक अपने दोपहिया वाहन का इंश्योरेंस नहीं करवाया है, तो अपने वाहन का इंश्योरेंस जल्द से जल्द कराएं!