थर्ड‑पार्टी बाइक इंश्योरेंस प्राइस
टू‑व्हीलर्स के लिए थर्ड‑पार्टी बाइक इंश्योरेंस रेट्स
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टू-व्हीलर थर्ड पार्टी इंश्योरेंस की क़ीमत
क्या आपने कभी सोचा है कि बाइक को गलत तरीके से ड्राइव करने से थर्ड पार्टी को नुकसान हो सकता है? आपके साथ कभी ऐसा हुआ है? या फिर किसी और की ड्राइविंग की वजह से आपको नुकसान हुआ हो, जबकि आपकी कोई गलती भी न रही हो? अगर हां, तो आप थर्ड पार्टी लायबिलिटी इंश्योरेंस की ज़रूरत समझते होंगे।
ज़्यादातर सड़क पर हुई दुर्घटना में प्रॉपर्टी का नुकसान होता है, व्यक्ति को चोट लगती है और कभी कभी व्यक्ति की मौत भी हो जाती है। इसमें दो पक्ष होते हैं जो खुद इस मसले को हल नहीं कर पाते हैं। इस वक्त आपका थर्ड पार्टी बाइक इंश्योरेंस काम आता है। ऐसे में मुआवज़े की अमाउंट मोटर क्लेम ट्रिब्यूनल तय करता है।
थर्ड पार्टी बाइक इंश्योरेंस की प्रीमियम दरें
थर्ड पार्टी बाइक इंश्योरेंस का प्रीमियम बाइक की इंजन कैपेसिटी के आधार पर तय किया जाता है। चलिए साल 2019-20 की तुलना में 2022 की क़ीमतों पर नजर डालते हैं।
|
इंजन कैपेसिटी |
2019-20 के लिए प्रीमियम, भारतीय रुपए में |
नया टू व्हीलर थर्ड पार्टी रेट (1 जून 2022 से लागू) |
|
75सीसी से ज़्यादा नहीं |
₹482 |
₹538 |
|
75 सीसी से 150 सीसी के बीच |
₹752 |
₹714 |
|
150 सीसी से 350 सीसी के बीच |
₹1193 |
₹1366 |
|
350 सीसी से ज़्यादा |
₹2323 |
₹2804 |
नए टू व्हीलर के लिए थर्ड पार्टी प्रीमियम (5 साल की सिंगल प्रीमियम पॉलिसी)
|
इंजन कैपेसिटी |
2019-20 के लिए प्रीमियम, भारतीय रुपए में |
नया टू व्हीलर थर्ड पार्टी रेट (1 जून 2022 से लागू) |
|
75सीसी से ज़्यादा नहीं |
₹1,045 |
₹2,901 |
|
75 सीसी से 150 सीसी के बीच |
₹3,285 |
₹3,851 |
|
150 सीसी से 350 सीसी के बीच |
₹5,453 |
₹7,365 |
|
350 सीसी से ज़्यादा |
₹13,034 |
₹15,117 |
नई इलेक्ट्रिक व्हीकल टू व्हीलर का प्रीमयम (1 साल की सिंगल प्रीमियम पॉलिसी
|
गाड़ी की किलोवाट (KW) कैपेसिटी |
2019-20 के लिए प्रीमियम, भारतीय रुपए में |
नया टू व्हीलर थर्ड पार्टी रेट (1 जून 2022 से लागू) |
|
3KW से ज़्यादा नहीं |
₹410 |
₹457 |
|
3KW से 7KW के बीच |
₹639 |
₹609 |
|
7KW से 16KW के बीच |
₹1014 |
₹1161 |
|
16KW से ज़्यादा |
₹1975 |
₹2383 |
नई इलेक्ट्रिक व्हीकल टू व्हील के लिए प्रीमियम (5 साल की सिंगल प्रीमियम पॉलिसी)
|
गाड़ी की किलोवाट (KW) कैपेसिटी |
2019-20 के लिए प्रीमियम, भारतीय रुपए में |
नया टू व्हीलर थर्ड पार्टी रेट (1 जून 2022 से लागू) |
|
3KW से ज़्यादा नहीं |
₹888 |
₹2466 |
|
3KW से 7KW के बीच |
₹2792 |
₹3273 |
|
7KW से 16KW के बीच |
₹4653 |
₹6260 |
|
16KW से ज़्यादा |
₹11,079 |
₹12,849 |
350 सीसी से ज़्यादा की बाइक की दरों में बढ़ोत्तरी का कोई प्रस्ताव नहीं रखा गया। फिर भी क़ीमतों में बढ़ोत्तरी की अपेक्षा की जाती है, इसलिए इंश्योरेंस कंपनियों को बाइक, स्कूटर जैसे नए टू-व्हीलर के लिए लांग टर्म थर्ड पार्टी प्रीमियम चार्ज़ करने की अनुमति है।
थर्ड पार्टी बाइक इंश्योरेंस प्रीमियम पर असर डालने वाले फ़ैक्टर?
टू-व्हीलर की बढ़ती संख्या, बढ़ती सड़क दुर्घटना की वजह बनती हैं। इसलिए सरकार ने थर्ड पार्टी प्रीमियम में भी इसी अनुपात में बढ़ोत्तरी की है।
बाइक की इंजन कैपेसिटी अलग-अलग बाइक के थर्ड पार्टी प्रीमियम का निर्धारण करने में मदद करती है।
थर्ड पार्टी बाइक इंश्योरेंस में क्या कवर होता है?
थर्ड पार्टी बाइक इंश्योरेंस में क्या कवर नहीं होता है?
क्लेम करते समय कोई परेशानी न हो इसलिए यह जानना भी ज़रूरी है कि थर्ड पार्टी बाइक इंश्योरेंस में क्या कवर नहीं होता है। यहां पर ऐसी कुछ स्थितियों के बारे में बताया गया है:
थर्ड पार्टी बाइक इंश्योरेंस क्यों ज़रूरी है?
मोटर व्हीकल एक्ट के तहत आपको थर्ड-पार्टी बाइक इंश्योरेंस की ज़रूरत क्यों होती है?
कानूनी कंप्लायंस (Legal Compliance): थर्ड पार्टी लायबिलिटी पॉलिसी लिए बिना टू-व्हीलर के मालिक भारतीय सड़कों पर ड्राइविंग नहीं कर सकते हैं।
बड़ी लायबिलिटी (Enormous Liability): यह बात बिल्कुल सही है कि थर्ड पार्टी को हुए नुकसान का मुआवज़ा कोई भी नहीं देना चाहता है और कई मामलों में लोग यह ख़र्च वहन भी नहीं कर पाते हैं। यहीं पर थर्ड पार्टी इंश्योरेंस काम आता है, इससे ऐसे ख़र्च को कवरेज़ मिलता है।
बाइक मालिक कौनसे मौकों पर थर्ड-पार्टी को हुए नुकसान को पूरा करने के लिए जिम्मेदार होगा
चोट लगने की स्थिति में (In the case of Injury): चोटिल या घायल पक्ष (थर्ड पार्टी) मेडिकल से जुड़े ख़र्च, शारीरिक अपंगता संबंधी मुआवज़े की मांग कर सकता है। घायल पक्ष आपकी बाइक से हुई दुर्घटना के बाद कमाई न कर सकने के नुकसान का मुआवज़ा भी मांग सकता है। अगर किसी और की गलती के चलते आपको भी चोटें आई हैं तो आप भी मुआवज़े की मांग कर सकते हैं।
मौत हो जाने की स्थिति में (In the case of Death): मृतक के आश्रित मौत की वजह बनी चोट के इलाज पर हुए मेडिकल ख़र्च की मांग कर सकते हैं। कुछ मामलों में कमाई के नुकसान का मुआवज़ा भी मांगा जा सकता है।
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