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हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम को कैसे कम करें?

पिछले कुछ सालों में भारतीयों को बढ़ते मेडिकल ख़र्चों के कारण काफ़ी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। निम्न और मध्यम आय वर्ग के लोगों के लिए स्वास्थ्य इलाज के बढ़ते ख़र्च वहन कर पाना मुश्किल होता जा रहा है।

ऐसे में हमें क्या करना चहिए?

एक हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी ज़रूर लेनी चाहिए!

भारत में, हेल्थ इंश्योरेंस की सुविधा देने वाली करीब 34 कंपनियां हैं। इंश्योरेंस प्लान बीमारी या दुर्घटना में इलाज के ख़र्च को वहन करने में मदद करते हैं। लेकिन कई बार, यह कवर किफ़ायती नहीं होते हैं। इनको ख़रीदना ही काफ़ी महंगा पड़ जाता है।

तो ऐसी स्थिति में आपको क्या करना चाहिए? जानने के लिए आगे पढ़िए!

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ल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम को कम करने के 10 तरीके

को-पेमेंट

डिडक्टिबल

को-इंश्योरेंस

को-पेमेंट का मतलब उस अमाउंट से है जो इलाज के दौरान आप ख़र्च करते हैं, जबकि बाक़ी अमाउंट क्लेम सैटलमेंट में कवर हो जाती है।

डिडक्टिबल वह फ़िक्स अमाउंट होती है जिसे इंश्योरेंस पॉलिसी द्वारा इलाज ख़र्च के पेमेंट किए जाने से पहले आपको पे करनी होती है।

इंश्योरेंस कंपनी की ओर से को-पेमेंट के विकल्प के तौर पर को-इंश्योरेंस का इस्तेमाल किया जाता है।

को-पेमेंट की अमाउंट फ़िक्स होती है लेकिन यह अमाउंट अलग-अलग सर्विस के लिए अलग-अलग रहती है।

इंश्स्योरेंस पॉलिसी बिल का बड़ा हिस्सा कवर करती है।

को-इंश्योरेंस के साथ आपको इलाज के ख़र्च का निर्धारित प्रतिशत खुद वहन करना होता है। जबकि बाकी का ख़र्च इंश्योरेंस कंपनी वहन करती है। को-इंश्योरेंस की अमाउंट फ़िक्स नहीं होती है।

आप कॉस्ट शेयरिंग प्लान के बारे में मिली यह जानकारी हेल्थ इंश्योरेंस प्लान के प्रीमियम को कम करने में इस्तेमाल कर सकते हैं।

इसका ज़्यादा से ज़्यादा फ़ायदा लेने के लिए उन हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी की तुलना करनी होगी जो कॉस्ट शेयरिंग का विकल्प ऑफ़र करती हैं।

इसका कारण यह है कि अगर आप को-पेमेंट और डिडक्टिबल वगैरह की सही अमाउंट नहीं चुनते हैं तो हो सकता है आपने प्रीमियम पेमेंट में जितनी बचत की है उससे कहीं ज़्यादा इलाज का ख़र्च देना पड़ जाए।

 को-पेमेंट, को-इंश्योरेंस और डिडक्टिबल में अंतर के बारे में और ज़्यादा जानें

ज़ोन ए

ज़ोन बी

ज़ोन सी

दिल्ली/एनसीआर, नवी मुंबई, थाणे और कल्याण के साथ मुंबई

हैदराबाद, सिकंदराबाद, बैंगलुरु, कोलकाता, अहमदाबाद, बड़ौदा, चेन्नई, पुणे और सूरत

ज़ोन ए, बी और सी समेत सभी शहर

लगभग ₹6,448 का प्रीमियम

लगभग ₹5,882 का प्रीमियम

लगभग ₹5,315 का प्रीमियम

इसलिए आप जिस ज़ोन में रहते हैं, उसके लिए ही पॉलिसी ख़रीदें। उदाहरण के लिए, अगर आप ज़ोन बी या सी वाले शहर में रहते हैं तो ज़ोन ए के लिए पॉलिसी ना ख़रीदें। ऐसा करने पर आपको ज़्यादा प्रीमियम देना पड़ सकता है। इस प्रकार, आप अपनी पॉलिसी के लिए सही ज़ोन का चुनाव करके, यह सुनिश्चित कर पाएंगे कि आप एकदम किफ़ायती प्रीमियम का पेमेंट कर रहे हैं।

मापदंड

इंडिविजुअल प्लान

फ़ैमिली फ़्लोटर प्लान

इस्तेमाल

इन प्लान में सिर्फ़ एक इंश्योरेंस प्लान के अंतर्गत परिवार के हर सदस्य के लिए सम इंश्योर्ड फ़िक्स होती है।

इस प्लान में सम इंश्योर्ड की पूरी अमाउंट सिर्फ़ एक व्यक्ति के इलाज में ख़र्च की जा सकती है।

प्रीमियम पेमेंट

इस तरह की हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी में प्रीमियम का निर्धारण कवर होने वाले व्यक्ति की उम्र और सम इंश्योर्ड के आधार पर होता है।

इसमें ज़्यादातर हेल्थ इंश्योरेंस प्लान का प्रीमियम, कवर किए गए परिवार के सबसे बड़े सदस्य की उम्र पर आधारित होता है।

क़ीमतों में अंतर

हर पॉलिसी के लिए प्रीमियम पेमेंट आमतौर पर ज़्यादा होता है।

फ़ैमिली फ़्लोटर प्लान के साथ पॉलिसी की क़ीमत इंडिविजुअल हेल्थ इंश्योरेंस प्लान की तुलना में 20 प्रतिशत तक कम हो जाती है।

ऊपर दी गई टेबल से आप देख सकते हैं कि इंडिविजुअल प्लान की तुलना में फ़ैमिली फ़्लोटर इंश्योरेंस काफ़ी किफ़ायती होते हैं।

इसलिए अगर आप पूरे परिवार के लिए इंश्योरेंस प्लान लेना चाहते हैं तो फ़ैमिली फ़्लोटर इंश्योरेंस पॉलिसी लेकर प्रीमियम की अमाउंट को कम कर सकते हैं।

हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम कम करने के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले सवाल