क्या मेन्टल हेल्थ बीमा द्वारा कवर किया जाता है?
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नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरो साइंसेज की ओर से वित्तीय वर्ष 2016 के लिए कराए गए नेशनल मेंटल हेल्थ सर्वे ऑफ़ इंडिया के मुताबिक करीब 15% भारतीय व्यस्कों को मेन्टल हेल्थ से जुड़े एक या इससे ज्यादा मामलों के लिए इलाज की जरूरत है।
मेन्टल हेल्थ इंश्योरेंस के बारे में जानिए
मेन्टल हेल्थ इंश्योरेंस में क्या कवर होता है?
मेन्टल हेल्थ से जुड़े इंश्योरेंस में वो सभी खर्चे कवर होते हैं, जो की मानसिक बीमारी के इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराने पर होते हैं। इसमें उपचार, दवाएं, कमरे का किराया और एंबुलेंस का खर्चा वगैरह शामिल है।
मेन्टल हेल्थ इंश्योरेंस किसको लेना चाहिए?
मेन्टल हेल्थ से जुड़े इंश्योरेंस की कवरेज उस व्यक्ति के लिए है जिसके परिवार में ऐसा पहले भी हुआ हो, उसे कोई दर्दनाक अनुभव हुए हों, जिसके चलते उस व्यक्ति को ये बीमारी होने की संभावना हो। ये उन लोगों को भी हो सकता है जिन्हें दुर्घटना के बाद की दिक्कतें हों या उन्हें अपने किसी करीबी को खोने का डर हो। अब के तनावपूर्ण रहन-सहन वाली परिस्थितियों के साथ असल में सभी लोग मानसिक बीमारी की चपेट में आ सकते हैं।
क्लेम करने के लिए कम से कम कितने समय में मानसिक बीमारी के रोगी को अस्पताल में भर्ती होना चाहिए?
मानसिक बीमारी के रोगी को हेल्थ इंश्योरेंस में खर्चों का क्लेम करने के लिए कम से कम 24 घंटों में अस्पताल में भर्ती हो जाना चाहिए।
क्या मेन्टल हेल्थ इंश्योरेंस कवरेज में परामर्श और काउंसलिंग भी कवर होते हैं?
इंश्योरेंस करने वाली कुछ ही कंपनियां ओपीडी बेनिफिट के तहत मानसिक बीमारी से जुड़े परामर्श और काउंसलिंग को कवर करती हैं। लेकिन ध्यान से ये जांचने की जरूरत होती है कि आपकी हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी के प्लान में ओपीडी और मेन्टल हेल्थ से जुड़े फायदे शामिल हैं या नहीं।
मेन्टल हेल्थ इंश्योरेंस के लिए क्या कोई वेटिंग पीरियड भी होता है?
पहले से मौजूद कई दूसरी परिस्थितियों की तरह, मानसिक बीमारी से जुड़े फायदों में भी वेटिंग पीरियड होता है, जिसे इंश्योरेंस करने वाली कंपनी को वहन किया जाना चाहिए। ज्यादातर इंश्योरेंस कंपनियों की ओर से मानसिक बीमारी से जुड़े फायदों के लिए वेटिंग पीरियड 2 साल का दिया जता है। इसलिए अगर आपने आज हेल्थ इंश्योरेंस खरीदा है तो मानसिक बीमारी के चलते हुए खर्चों का क्लेम करने के लिए आपको 2 साल इंतजार करना होगा। इसलिए, सुझाव यही दिया जाता है कि जल्दी शुरू करें और अपनी पहली पॉलिसी से इन फायदों को लें । तो आपका वेटिंग पीरियड तब पूरा होगा, जब आपको इसकी सख्त जरूरत होगी।
तो, मानसिक बीमारियों वाली सूची में कौन सी बीमारियां शामिल हैं?
कुछ ऐसी जानी मानी बीमारियां हैं जो मानसिक बीमारियों वाली सूची में शामिल हैं
मेन्टल हेल्थ इंश्योरेंस में क्या कवर नहीं होता है?
मानसिक बीमारी से जुड़े इंश्योरेंस में मरीज को अस्पताल में भर्ती कराने पर होने वाले खर्चे ही कवर होते हैं। इंश्योरेंस करने वाली कुछ कंपनियां ही आउट-पेशेंट केयर जैसे परामर्श के खर्चों को कवर करती हैं। एल्कोहल या ड्रग के चलते हुई मानसिक बीमारी कवर नहीं होगी।
इसके साथ ही अगर मानसिक स्थिति बार-बार खराब होती है तो हो सकता है कि क्लेम स्वीकार ना किया जाए।
मेन्टल हेल्थ से जुड़ा इंश्योरेंस दिखाता है कि पिछले कई सालों से मानसिक बीमारी को किस नजरिए से देखा जाता रहा है। अगर आपको लगता है कि आपके अपने किसी भी तरह की मानसिक बीमारी से पीड़ित हैं तो ये समय गहराई से समझने का है। ये समय हमारे बात करने का है ताकि ये सुनिश्चित किया जा सके उनको सही समय पर मदद मिल जाए।
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